चरण 01 — एक इमेज अपलोड करें और मूवमेंट का वर्णन करें
एक साफ़ सोर्स इमेज जोड़ें, फिर अपनी मनचाही कैमरा मूवमेंट, विषय की क्रिया और दृश्य परिवर्तनों के लिए एक छोटा प्रॉम्प्ट लिखें।
टेक्स्ट से वीडियो और इमेज तैयार करें, संदर्भ के लिए इमेज अपलोड करें, और नेगेटिव प्रॉम्प्ट व CFG स्लाइडर से अनचाहे तत्वों को शुरुआत से ही रोकें।






एक ही इमेज से पोस्ट करने के लिए तैयार क्लिप तक — कोई सेटअप नहीं, कोई प्लगइन नहीं, कोई Discord नहीं।
एक साफ़ सोर्स इमेज जोड़ें, फिर अपनी मनचाही कैमरा मूवमेंट, विषय की क्रिया और दृश्य परिवर्तनों के लिए एक छोटा प्रॉम्प्ट लिखें।
अपनी क्लिप की लंबाई और आस्पेक्ट रेशियो चुनें, और जब आउटपुट को मूल रूप के करीब रखना हो तो इमेज कंडीशनिंग जोड़ें।
जनरेट पर क्लिक करें और कुछ मिनट प्रतीक्षा करें। Kling 2.5 Turbo आपकी क्लिप बनाता है। इसे डाउनलोड करें, या प्रॉम्प्ट समायोजित करें और एक तेज़ वैरिएंट चलाएं।

Cleep AI में पहले टेक्स्ट प्रॉम्प्ट लिखें और साथ में नेगेटिव प्रॉम्प्ट में वे चीज़ें जोड़ें जो नहीं चाहिए (जैसे “टेक्स्ट, वॉटरमार्क, अतिरिक्त उंगलियाँ”). स्टाइल या प्रोडक्ट संदर्भ बनाए रखने के लिए लक्ष्य इमेज अपलोड करें, फिर CFG (Classifier Free Guidance) को कम-ज़्यादा करके पालन बनाम क्रिएटिविटी का संतुलन तय करें। अंत में आउटपुट मोड चुनें—टेक्स्ट-टू-वीडियो या टेक्स्ट-टू-इमेज—और जनरेट करें।

एड क्रिएटिव में टेक्स्ट-टू-वीडियो से 6–10 सेकंड के शॉट बनाकर अलग-अलग हुक/एंगल जल्दी टेस्ट किए जा सकते हैं, जबकि नेगेटिव प्रॉम्प्ट ब्रांड-सेफ फ्रेम बनाए रखता है। ई-कॉम में टेक्स्ट-टू-इमेज से कैटलॉग-स्टाइल विज़ुअल बनते हैं और इमेज अपलोड से पैकेजिंग/कलर टोन स्थिर रहता है। कंटेंट टीम CFG बढ़ाकर निर्देशों का कड़ा पालन करा सकती है या घटाकर अधिक सिनेमैटिक वैरिएशन निकाल सकती है।

आउटपुट मिलते ही फ्रेम-टू-फ्रेम स्थिरता, चेहरे/हाथ की विकृति और बैकग्राउंड में अनचाहे टेक्स्ट/लोगों की जाँच करें। अगर निर्देशों से भटकाव हो रहा हो तो CFG थोड़ा बढ़ाएँ; अगर दृश्य बहुत “कठोर” लगे तो CFG घटाकर अधिक प्राकृतिक मोशन/लाइटिंग लें। बार-बार वही गलती आए तो नेगेटिव प्रॉम्प्ट में उस तत्व का स्पष्ट उल्लेख जोड़ें और उसी रेफरेंस इमेज अपलोड के साथ दोबारा रन करें।

यह मॉडल नेगेटिव प्रॉम्प्ट और CFG के जरिए “क्या नहीं चाहिए” और “कितना पालन चाहिए” जैसे निर्णयों को सीधे वर्कफ़्लो में लाता है, जिससे ट्रायल-एंड-एरर कम होता है। टेक्स्ट-टू-वीडियो और टेक्स्ट-टू-इमेज दोनों मोड एक ही सेटअप में मिलने से टीम अलग-अलग टूल बदलने के बजाय एक ही प्रॉम्प्ट लॉजिक से आउटपुट निकाल सकती है। इमेज अपलोड सपोर्ट के साथ संदर्भ-आधारित क्रिएशन संभव होता है, खासकर जब स्टाइल या प्रोडक्ट पहचान स्थिर रखनी हो।

Cleep AI पर प्रॉम्प्ट लिखें, नेगेटिव प्रॉम्प्ट में जोखिम वाले तत्व हटाएँ और जरूरत हो तो रेफरेंस इमेज अपलोड करें। फिर CFG ट्यून करके वही आउटपुट लें जो आपके शॉट/स्टाइल से मेल खाए—वीडियो हो या इमेज। तैयार होने पर टीम के लिए एक स्थिर टेम्पलेट बनाकर अगली बार उसी सेटिंग्स से तेज़ी से दोहराएँ।
